साहित्य

अफसाने

जयश्री बिरमी

दिल के फसाने बन जातें हैं अफसानें
और हकीकतें बन जाती हैं फसानें
आज तो सुंदर सी सुबह हैं रात भी हसीन ही होगी
दिल की बात कहेंगे जरूर
चाहे बनते रहे अफसानें
याद करेगा जमाना जो लीखें हैं
दिल की कलम से हमनें
याद भी हैं ,और वो गुजरें हुए जमाने
इश्क की ही कहानी गुलों गुलशन भी दोहराएंगे
महकेगी खुशबू इश्क की
जब जब लम्हों को दोहराएंगे
नहीं दिन भूलेंगे और न रातें
हुस्न और इश्क ने लिए की हैं कुर्बान कई रातें
कहदें आज हर शह को कि
हमने नहीं लुकाएं हैं अपने अफसानें

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद

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