गजलसाहित्य

अभी भी मुहब्बत जिंदा है

__कैलाश चंद साहू

अभी भी मुहब्बत जिंदा है
फिर भी इनायत जिंदा है।।

वादों इरादों का क्या अब
अभी भी नफरत जिंदा है।।

क्यों करते हो वादा तुम
अभी भी इबादत जिंदा है।।

हर लम्हा याद में तेरे
अभी भी नजाकत जिंदा है।।

महफूज नहीं तेरी वफ़ा
फिर भी सवालात जिंदा है।।

हुस्न का जलवा है तिरि
अभी भी नसीहत जिंदा है।।

जीने की तमन्ना मुझमें
अब भी इबादत जिंदा है।।

फूलो की क्या बिसात
अभी भी नफासत जिंदा है।।

तेरी मुहब्बत का मुकाम
अभी भी मुहब्बत जिंदा है।।

बहुत पुरानी पहचान है
वहीं अभी इमारत जिंदा है।।

मुंह फेर लिया उसने पर
मुहब्बत अभी भी जिंदा है।।

अब तलक भी तुम कमाल
तेरी हर जियारत जिंदा है।।

खूबसूरत तेरी निगाहें यार
अभी भी मुहब्बत जिंदा है।।

मेरी कोशिश तुम्हे याद है
अभी भी शिकायत जिंदा है।।

कैलाश चंद साहू
बूंदी राजस्थान

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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