साहित्य

अवतार

प्रीति चौधरी”मनोरमा”

आओ भगवन इस कलयुग में
लेकर के तुम कान्हा अवतार
सत्य पलायन कर रहा है जग से
फैला है असत्य का गहन अंधकार।

प्रस्थान कर गयी है ममता मन से
गमन कर गयी है शुचिता तन से,
इंसानियत समाप्त है जन-जन से
संवेदना हीन हुआ यह संसार।

पग -पग पर हैं असंख्य बाधाएँ,
धूमिल हुईं हैं मन की आशाएँ
सतही तौर पर अधर मुस्कुराएँ
आह!अंतर में मचा है हाहाकार।

प्रीति चौधरी”मनोरमा”
जनपद बुलंदशहर
उत्तरप्रदेश
मौलिक एवं अप्रकाशित।

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