साहित्य

अवधी रचना

राजेश श्रीवास्तव राज

नवराते मां आई भवानी
देखो लाल चुनरिया ओढ़े
फागुन बीतगा चईत है आई
नौ दिनवा मां नौ मइया आई
माई के दुआरे देखो कईसन
केतना सगरौ भीड़ भवा
लाई बतासा चुनरी चूड़ी
नरियल कै गोला चढिगा
परिवा कै भिनसारे हमरे
माई के नीक श्रंगार भवा
श्रद्धा भाव से उपवास धरै
नवराते के कीर्तन गावों सब
नौ दिन कै नौ विधि कै पूजा
माई कै पचरा खूब कहा
ढोल मृदंग झांझ बजावें
चइत मास में आई है मइया
सबकै मनोकामना पूरन होवैं
पूरी लपसी विधि से बनवावैं
सबकै खूब भंडारा करवावैं
जय जयकार मइया कै होवैं
सकल जगत कल्याण भी होवैं
नवराते मां आई भवानी
लाल चुनरिया ओढे

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