गजलसाहित्य

आँखो में अपनी दोस्तो ऐसी नज़र पैदा करो

__डॉ रमेश कटारिया पारस

आँखो में अपनी दोस्तो ऐसी नज़र पैदा करो
पत्थर भी पिघल जाएआवाज़ में वो असर पैदा करो

था इंतजार दुष्यन्त को जिस सुबह का दोस्तो
अपने दम पर आप भी ऐसी इक सहर पैदा करो

आकाश की ऊंचाईयां भी ऐसी कुछ ज्यादा नहीँ
कदमों में होंगी आपके ऐसी लहर पैदा करो

हर धर्म के लोग दो पल चैन से बैठे जहाँ
आप अपने सहन में इक ऐसा शज़र पैदा करो

कौन कहता है असर होता नहीँ है शेर में
पहले अपने शैरो में हटकर कहन पैदा करो

देख कर जिसको मुसाफ़िर मंजिलें पा जाएँगे
रहगुज़र में कोई एक ऐसी किरन पैदा करो

कौन कहता है नहीँ सुनी जाएगी तेरी सदा
पारस अपनी बात में थोड़ा वज़न पैदा करो

डॉ रमेश कटारिया पारस

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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