साहित्य

आओ शुभ कल्पना को करें साकार

अर्चना चौहान

दीपमाला से दीप्तिमान जग सारा।
प्रकाशित हो हर घर उजियारा।
धरती अंबर तक मिटे अंधकार।
आओ शुभ कल्पना को करे साकार।

दीप जलता तम की गोद में।
लौ आस की मोद में ।
तिमिर हारता मौज ही मौज में ।
जलता प्रकाश की खोज में।
आओ मन कल्पना को दे आकार।

दीप प्रेम के सजाए।
खुशियों की हो लड़ियां।
अभिलाषा ओं की फुलझड़ियां।
बाती श्वांस विश्वास की।
आओ शुभ कल्पना को दे प्रकार।

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