साहित्य

आखिर क्यों?????


आखिर क्यों??????????
क्या हो एक खूबसूरत पेशा
कभी नहीं था सोचा ,
मेरे मन मंदिर में केवल
भरा हुआ था पैसा।
एक डॉक्टर अपनी आगामी पीढ़ी को
डॉक्टर बनाना चाहता है,
एक इंजीनियर अपने बच्चों को
अपने ही हुनर सिखाता है ,
एक व्यवसायी अपने व्यवसाय को
वंश के साथ बढ़ाता है ,
लेकिन एक अध्यापक अपने बच्चे को
इनमें से ही एक बनाना चाहता है ।क्यों?????
इन अच्छे पदों पर बैठे हुए लोगों को
अध्यापक ही तो सब कुछ सिखाता है,
वह शिक्षा दाता है ,वह भाग्य निर्माता है,
पर अपने बच्चों को शिक्षक नहीं बनाना चाहता है ।क्यों???????????????
क्योंकि जिंदगी की रेलम पेल में
कभी खुशी कभी गम के खेल में,
धन की जद्दोजहद में
पैसों की अंधी कैद से ,
वह मुक्त नहीं हो पाता है
तभी तो अपने बच्चों को
शिक्षक बनाना नहीं चाहता है।
पर गौर करें अध्यापक वह है
जो हमें अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाते हैं।
अध्यापक वह है जो ,
हमें मेहनत का पाठ पढ़ाते हैं ।
अध्यापक वह हैं जो ,
जिंदगी का जोड़ घटाव समझाते हैं।
अध्यापक वह हैं जो
हमें मशीनी पढ़ाई तो कराते हैं,
पर मशीन बनने से हमें बचाते हैं।
औरखुद जिंदगी की दौड़ में कहीं दूर ,
पीछे रह जाते हैं क्यों????????
तो रखिए मान डॉक्टर ,इंजीनियर
और व्यवसायियों को बनाने वालों को,
दीजिए सम्मानआपके बच्चों के
भविष्य के रखवालों को,
और आइए नमन करें
उन शिक्षा के मतवालों को ।
शत-शत नमन अध्यापक
शत-शत प्रणाम शिक्षक।।।।।।।।।।
स्वरचित सीमा कौशल
यमुनानगर हरियाणा

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