साहित्य

आज की नारी

इशिका गुप्ता

खामोश हूँ,
ये नहीं कि आवाज़ नहीं,
चुप हूँ,
ये नहीं कि बोलती नहीं,
झुक रहीं हूँ,
ये नहीं कि,
स्वाभिमान नहीं,
हार रहीं हूँ,
ये नहीं कि,
जीत नहीं सकती,
क्यूंकि जितना चाहती ही नहीं,
नारी हूँ,
कोई अपमान नहीं,
आदर करो,
अनादर नहीं,
आज का नारी हूँ,
कोई अबला नारी नहीं,
नारी शक्ति हूँ,
कोई कमज़ोर नहीं,
नारी नारायणी हूँ,
कोई अभिशाप नहीं,
नारी हूँ,
प्यार,और ममता कि मुरत हूँ,
कोई नफरत कि काबिल नहीं,
नारी को,
प्यार करो, आदर सम्मान करो,
अनादर औऱ नफरत नहीं,
नारी हूँ,
प्रेम कि देवी हूँ,
कोई घृणा कि पात्र नहीं,
सह रहीं हूँ,
ये नहीं कि डरी हूँ,
खामोश हूँ,
ये नहीं कि आवाज़ नहीं,
नारी हूँ,
वृक्ष कि तरह,
सबको अपनी,
छाव में पालती हूँ,
कोई सुखी लकड़ी नहीं,
नारी हूँ,
फूल कि तरह नाज़ुक,
कोई कमज़ोर नहीं,
नारी हूँ,
कलि कि तरह नाज़ुक तो,
पत्थर कि चट्टान भी,
नारी हूँ,
घर को सजाती हूँ ,
संवारती हूँ,
संभालती हूँ,
कोई गुलाम नहीं,
खामोश हूँ,
ये नहीं कि आवाज़ नहीं,
रिश्तों को निभाती हूँ,
कोई गिरती नहीं हूँ,
नारी हूँ,
कोई अपमान नहीं,
छोटी- छोटी गलतियों को माफ़ी मांगती हूँ,
क्यूंकि रिस्ते निभाना जानती हूँ,
तोड़ती नहीं,
आज का नारी हूँ,
कोई अबला नारी नहीं,
झुका दे कोई नारी को,
किसी में हिम्मत नहीं,
नारी हूँ,
कभी हारना जानती नहीं,
हारती हूँ,
क्यूँ कि जितना चाहती नहीं,
नारी हूँ,
कोई अपमान नहीं,
चुप हूँ,
ये नहीं कि बोलती नहीं,
मौन हूँ,
निशब्द नहीं,
आवाज़ हैं,
बस बोलती नहीं,
ज़ज्बात हैं,
पर मुह खोलती नहीं,
आस हैं,
पर निराश नहीं,
चाहत हैं,
पर किसी से उम्मीद नहीं,
नारी हूँ,
कोई अपमान नहीं,
आईना हूँ,
पर टूटकर बिखरती नहीं,
सौ सवालों से उलझी हूँ,
ये नहीं कि सुलझी नहीं,
दर्द से भरी हूँ,
पर जीना छोड़ी नहीं,
नारी हूँ,
कोई अपमान नहीं,,,,,,,,

“”””नारी नफरत की लायक नहीं,,
प्यार के लायक होती हैं””””

“””””इतिहास गवाह हैं “”””
इतिहास उठाकर देखो लो,,
जब -जब ,नारी को अपमान हुआ,,
तब -तब जग का नाश हुआ,,,,,,,,,,

मुर्ख हैं, वो लोग जो,,कहते हैं,,
नारी का अपना कुछ नहीं,,
नारी के बिना वो कुछ नहीं,,

woman’s is the epitome of love,,,
not hate
मेर अल्फाज ishika Gupta

सासाराम (बिहार)

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