साहित्य

आदिशक्ति माता

माँ आई शेर पर सवार
चलो बनाये हम उनके
लिये लाल चुनरियाँ का
आसन सुन्दर सा उपहार
माँ नवमी में चौथे दिन आई
कुष्मांडा मैया प्यारी कहलाई
सूर्यमंडल के भीतर सूर्यलोक
रहता है इनका निवास
मान्यता बताते लोग
जब चारो और अंधेरा था
तब माता ने अंडकोष से
ब्रह्माण्ड को सजाया
कई तरह के पेड़ पौधे
जल जीवन हरियाली से
जीवन धरती को सजाया
मैया ने लाखों कुछ सोच कर
सृष्टि को बनाया
कई पशु पक्षियों से
दुनियाँ को बनाया
इसके अस्तितत्व को
बचाने की खातिर
इकोसिस्टम का निर्माण किया
सृष्टि की रचना को सजा कर
कुष्मांडा नाम है पाया
सृष्टि की उत्पत्ति के कारण
आदिशक्ति भी कहलाई
माता की ये रचना बहुत ही
प्यारी मुझको है भाई
शेर की सवारी करती मैया
ना किसी से डरती मैया
इनकी होती आठ भुजाये
साथ मे रहता है कमंडल
धनुषबाण कमल शुशोभित
अमृत पूर्ण कलश है धरती
चक्र गदा लिये भुजा में रहती
आठवें भुजा में मैया के
सभी सिद्धियां रहती
जप की माला लिये मैया
सब सिद्धियां रखती
इनका शरीर सूर्य समान
मुख मंडल पर तेज बरसता
इनका जीवन सदा ख़ुशियों के
सागर में डूबा रहता
मैया की आरती निज दिन करते
सब सुख मैया से जीवन मे
खुद के लिये है भरते
बाल गोपाल हम तेरे मैया
प्रणाम करते
तेरे चरणों मे सदा हम
रोज ही निखरते
जय माँ आदि शक्ति
मुझको भी शक्ति देना
जीवन के कठीन राँहो में
अपनी भक्ति देना।

कुमारी मंजू मानस
छपरा सारण
बिहार शिक्षक

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