साहित्य

आप आए नहीं

अनुपम चतुर्वेदी

आज का दिन कहीं बीत जाए नहीं,
रात का फिर नजारा डराए नहीं।

काश ऐसा न होता किसी से कहीं,
पास आए न वो दूर जाए नहीं।

ऐंठने की कला में निपुण थे कभी,
आज बैठे विचारे बनाए नहीं।

बात बनने-बिगड़ने कि नौबत न हो,
सोच लो फिर न हो आप आए नहीं।

कुछ करामात थी आंख में थी नमी,
एक ही रट कभी भी लगाए नहीं।

नाम ही तो लिया ,जान जाती रही,
नाम से तो कभी भी लजाए नहीं।

आपकी ही इनायत हमें भा गई,
आज भी चाहकर भूल पाए नहीं।

आज से आपकी लेखनी जो उठे,
प्रेम का आशियाना जलाए नहीं।

शाख से जो जुड़े दें उन्हें हौसला ,
घोषले से किसी को उड़ाएं नहीं।

अनुपम चतुर्वेदी, सन्त कबीर नगर, उ०प्र०
रचना मौलिक, सर्वाधिकार सुरक्षित
मोबाइल नं०-9936167676

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