कवितासाहित्य

आर यू ए रीडर

__सतेन्द्र शर्मा ‘तरंग’

पुस्तक से मिलता हमें, नित-नित अद्भुत ज्ञान।
करता जो इनका पठन, बनता जगत सुजान।।
बनता जगत सुजान, प्रकाश ज्ञान का करता।
कहलाता विद्वान, सभी अंधकार हरता।।
देता वह इन्सान, ज्ञान के दर पर दस्तक।
चढ़ता वह सोपान, नित्य जो पढ़ता पुस्तक।।

पुस्तक सबकी सारथी, पुस्तक हैं उपहार।
इनके अन्दर ही छिपा, जीवन का सब सार।।
जीवन का सब सार, यही सत्पथ दिखलाती।
मानव को जब चाह, पठन की मन भा जाती।।
मिलता अनुपम ज्ञान, ज्ञान से भरती मस्तक।
करलो इनसे प्यार, स्नेह बरसातीं पुस्तक।।

पुस्तक से दोस्ती करो, पुस्तक देती ज्ञान।
नित-नित इनका हो मनन, तब होता कल्याण।।
तब होता कल्याण, मनुज नित सीढ़ी चढ़ता।
पाता वह सम्मान, सफलता के पथ बढ़ता।।
कह तरंग कविराय, प्रभा पहुँचेगी उस तक।
पठन करे जो नित्य, शिखर दे उसको पुस्तक।।

पुस्तक का संसार यह, जग में है अनमोल।
पास रखो इनको सदा, यह तरंग के बोल।।
यह तरंग के बोल, समझ जाये जो मानव।
अनुपम पाये ज्ञान, मिटे अज्ञान का दानव।।
मन का तम हो दूर, प्रकाशित होगा मस्तक।
पढ़कर तुलसी, सूर, लिखोगे तुम भी पुस्तक।।

पुस्तक के अन्दर छिपा, दिव्य ज्ञान भण्डार।
इनमें मिलता है हमें, जीवन का सब सार।।
जीवन का सब सार, मार्ग पर चलना आता।
पढ़कर इनको नित्य, सफलता मानव पाता।।
सभी का हो प्रयास, किताबें पहुँचे सब तक।
सब दें शिक्षा दान, यही कहती हैं पुस्तक।।

सतेन्द्र शर्मा ‘तरंग’
११६, राजपुर मार्ग,
देहरादून (उत्तराखंड)

100% LikesVS
0% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!