कवितासाहित्य

आसमां


__एकता शर्मा

आसमां अगर दूर है तो क्या 
मैं आसमां को छूने की कोशिश करती हूं
मुझे अपने  नन्हे नन्हे 
पंखों पर पूरा विश्वास है 
इसलिए मैं अपने 
नन्हें पंखों को खोल 
उड़ने की कोशिश करती हूं 
कभी गिरती हूं,तो कभी संभलती हूं
तो कभी हल्की सी उड़ान भरती हूं
अभी आसमां मुझसे कुछ दूर है
लेकिन मेरे हौसलों की उड़ान
एक दिन जरूर आसमां तक पहुंच जाएगी 
छू लूंगी मैं एक दिन आसमान को 
और दिखा दूंगी इस जहान को
कोशिश करने वालों को 
उनका आसमान मिल ही जाता है


स्वरचित 
एकता शर्मा

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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