__डा.रमेश कटारिया
पारस
आस्तीन में चाहे सांपों को पालना
पर सच को सच कहने की आदत ना डालना
जाना है तुझे दूर तरक्की की राह पर
कोई काम आज़ का तू कल पे ना टालना
माना कि हक़दार है तू ऊँचे मक़ाम का
कोई ख्वाब आँख में तू ऐसा ना पालना
हर शक्स पे बराबर रहमत उसी की है
खुद को किसी से भी तू कम ना आँकना
जो लक्छ बनाया है उसी पर रहे नज़र
उसके ही साँचे में तू खुद को ढालना
डा.रमेश कटारिया
पारस