गजलसाहित्य

आज़ एक तरही गज़ल

__Dr रमेश कटारिया पारस

उसका पावन मन देखा है
फूलों सा उपवन देखा है

बसे हुए है मन में कान्हा
जबसे वरंदावन देखा है

घर उसका मन्दिर लगता है
जबसे प्रेम सदन देखा है

अब पचपन भी देखेंगे हम
अब तक तो बचपन देखा है

धन दौलत की इस दुनियाँ में
हर कोई दुशमन देखा है

क्या ।कर लेगा एक विभीषण
घर घर में रावण देखा है

वो क्या समझेगा आज़ादी
जिसने सिर्फ़ दमन देखा है

सबने देखे हँसते चेहरे
किसने कब क्रंदन देखा है

मन के अंदर देखो पारस
तुमने सिर्फ़ बदन देखा है

Dr रमेश कटारिया पारस

50% LikesVS
50% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!