साहित्य

उजालों ने नंगा कर दिया

के एल महोबिया

कातिल उजालों ने नंगाकर दिया इस शहर में
अंधेरों में करेगे बसेरे सजाए कातिल शहर में।

जला है मेरा दिल रोशनी भरी राहों के खबर से ।
ज़ालिम मुंह छुपाते हैं अक्सर अंधेरों के शहर में।

झूठ फरेब जुल्म सितमगर ही पनाहगार के चेहरे,
भले चंगे फूले वाखुदा के किस्से तम गर्दू के शहर में ।

दिन के उजालों में नहीं दिखती रोशनी करे कोई
अंधेरा ही अंधेरा है फैला चारों तरफ खुदगर्ज शहर मे।

अंधेरी रात में ही यह मुमकिन नहीं मुनासिब भी
कातिल हो गए रोशनी भरे दिन के उजले शहर में।

उजालों रख दी उधेड़ के शान वाजूद जिंदगी की
अंधेरों में ढूंढना अच्छा पनाहगार ही गवाह शहर में ।

नाहक बदनाम कर दिया हमने सभी अंधेरों को
दीखे नहीं की आंखें बंद की मैंने तेरे उजाले शहर में ।

के एल महोबिया
अमरकंटक अनूपपुर मध्यप्रदेश

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