कवितासाहित्य

एक तू ही है

हाल जो पूछोगे तुम मेरा,
पिघल जाऐंगे हम मोम की तरह।
रिश्ता है रूह से तेरी,
मेरा तेरे दिल से नाता है।
एक तू ही है ,
जिसके खातिर मैंने खुद को संभाला है।
रूक जाएंगी यह साँसे मेरी,
अगर तू मुझे छोड़कर चला गया।
पास ही रहना अब तू मेरे,
जुड़ गया है दिल मेरा तुझसे रांझा की तरह।
सिर्फ जरूरी है मेरे लिए तेरा पास होना।

गुनाह नहीं होता है मुहब्बत करना,
गुनाह है उसमें बहक जाना।
गुनाह है यह सोचकर की वो सिर्फ तुम्हारी है,
इस बात को लेकर उसे अपनी जिद्द बना लेना।
गुनाह है उसकी आँखों को नम करना,
जिसमें कोई और ना बस्ता तुम्हारे सिवा।
गुनाह है उसकी आबरू पर हाथ दालना,
जिसे उसने तुम्हारी मुस्कुराहट के लिए खो दाला।
गुनाह है तुमने उसकी मुहब्बत को मखौल समझना,
फिर भी उसके दिल में कोई ना बस्ता तुम्हारे सिवा।


-अमन वर्मा
जयपुर

92% LikesVS
8% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!