साहित्य

एक दिन रंग लाएगी

शायर आनंद कनक

वो तुम्हारी बुतपरस्ती एक दिन रंग लाएगी
वो हमारी जिंदगानी एक दिन रंग लाएगी।।

जब तलक रहेगी दुनिया में ये मारा मारी
इस दुनिया में तसल्ली एक दिन रंग लाएगी।।

प्यार मुहब्बत करके सहते हैं लोग मुसीबतें
हर कदम पर खामोशी एक दिन रंग लाएगी।।

माना कि जीवन है बहुत ही कठिन यहां पर
मुफलिसी होगी सस्ती एक दिन रंग लाएगी।।

जो दिल को छू गया है रहेगा दिल के करीब
उसकी चाहत देखना एक दिन रंग लाएगी।।

ये दुनिया का दस्तूर है करते हैं लोग वफ़ा भी
यह उनकी बुतपरस्ती एक दिन रंग लाएगी।।

मयकशी में पीना उनके लिए कोई नई बात
ये उनकी मयपरस्ती एक दिन रंग लाएगी।।

पीकर जाम भूल जाते है लोग अपनी फितरत
मुहब्बत से ही जिंदगी एक दिन रंग लाएगी।।

करना प्यार वफ़ा संग दिल्लगी फिर भी यहां
गुल खिलाएगी ये मस्ती एक दिन रंग लाएगी।।

मरकर भी जिंदा है मुहब्बत इस जहां में गर
कनक आशिकी हमारी एक दिन रंग लाएगी।।

स्वरचित मौलिक अप्रकाशित

शायर आनंद कनक
बूंदी राजस्थान

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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