साहित्य

एक युग बीत गया

डॉ.गोरथनसिंह सोढा ‘जहरीला’

हमारे संस्कारों का सागर रीत गया।
ऐसा लगता एक युग बीत गया।।

हमारी नसीहत का परचम लहराता था।
आज हम हारे जमाना जीत गया।।

खुद की संस्कृति सभ्यता भूल गये।
अपना तो सब रिवाजो रीत गया।।

बोलचाल में पश्चिमी सभ्यता हावी है।
नमस्कार से हाय हेलो जीत गया।।

‘जहरीला’ यार भाई सब मतलब के।
विश्वासी हमदर्द वो मनमीत गया।।

सर्वाधिकार सुरक्षित-

डॉ.गोरथनसिंह सोढा ‘जहरीला’
जिलाध्यक्ष
अखिल भारतीय साहित्य परिषद
बाड़मेर राजस्थान

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