कवितासाहित्य

एहसास

कमला सिंह

प्यार का एहसास
उम्र भर ना हुआ
जब हुआ तब
समय ने कहा
बदले बदले से
आशार है तुम्हारे
तुम पहुंचने लगी
कब्र के किनारे
मैंने कहा मौत
तुझसे ही मोहब्बत
करती हूं
वो कहने लगी
लोग मुझसे डरते हैं
ना जाने क्या-क्या
अपनी जिंदगी
और खुदा से कहते हैं
बचा लो मुझको
मैं जीना चाहती हूं
और तुम कहती हो
अपना लो मुझको
मैं मरना चाहती हूं
अरे पगली मरता
कोई नहीं जैसे
तुम कपड़े बदलती हो
वैसे ही मैं जिंदगी
बदलती हूं
एक तन को छोड़कर
दूसरे तन में
चली जाती हु
मैं आत्मा हूं तुम्हारी
अजर अमर है
मेरी जिंदगानी
अच्छा हुआ तुमने
तुम ने मुझे पुकारा
मैं आऊंगी जरूर
करती हूं तुमसे वादा
कुछ समय है
तुम्हारे पास
कर ले तू अपने
प्रभु पर विश्वास
वही नैया पार लगाएंगे
मझधार से तुमको
किनारे तक पहुंचाएंगे
मनन कर ले मन से
तेरा होगा कल्याण
अब तो कर ले
तू प्रभु का ध्यान

कमला सिंह छत्तीसगढ़

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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