साहित्य

ऐ दिल सुन जरा

अनुराधा प्रियदर्शिनी

जिंदगी की मुश्किलों से घबराया नहीं करते
हर किसी को अपने दुखड़े सुनाया नहीं करते

मेहनत से काम करने से घबराया नहीं करते
आलस्य को अपना साथी बनाता नहीं करते

मुट्ठी में फिसलती रेत को पकड़ा नहीं करते
वक्त बहुत कीमती उसको गंवाया नहीं करते

मदद जब भी करो एहसान जताया नहीं करते
किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाया नहीं करते

तरक्की के लिए शार्ट-कट अपनाया नहीं करते
औरों की बुलंदियों पर जाने से जला नहीं करते

स्वरचित एवं मौलिक रचना

अनुराधा प्रियदर्शिनी
प्रयागराज उत्तर प्रदेश
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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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