साहित्य

ओजस्वी थे थे ज्ञानवान

डॉसत्यमभास्कर

ओजस्वी थे, थे ज्ञानवान,
विरोधी भी उनका करते थे सम्मान,
अद्धभुत उनकी थी आभा,
मुख पर सदा मिलती थी मुस्कान,
साहित्य के वो महारथी,
स्मरण करता है सारा जहान,
महिमामंडन करुं या सूर्य को दिया दिखाऊँ,
निर्भिकता के थे वो प्रमाण,
एक हाथ हवा में लहराते,
मुख से निकलते जब देशगाण,
सपना उनका था बस यही,
जियूँ तो देश की खातिर, हों न्योछावर यहीं मेरे प्राण।

एक युग एक पल मे बीत गए,
वो शख्स फिर से आज जीत गए,
बहुत जिया, जी भर जिया,
जिंदगी को खूब जिया,
मैं फिर आउंगा लौटकर,
ये कहकर दिल जीत गए,
राजनीति से साहित्य तक,
सबके वो मनमीत रहे,
ब्रह्मांड मे शोक व्याप्त है,
एक युगांधर सबको छोड़ गए,
मुख पर मंद मुसकान,
कर्णप्रिय वाणी ,
लच्छेदार वक्तव्य,
विद्वता की पगडंडियों पर जीते गए,
हार को भी जो फटकार गए,
सबके सपने साकार किए,
भास्कर की प्रार्थना ईश्वर से,
उनकी आत्मा को शांति मिले,
“अटल बिहारी वाजपेयी” जी कहाँ चले गए,
अश्रुपूरित भावभीनी श्रद्धांजलि आप अमर रहें।
डॉ सत्यम भास्कर भ्रमरपुरिया

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