साहित्य

ओ मेरे मन के दीप

देवेन्द्र सोनी

🌺ओ मेरे मन के दीप
तु जल प्रतिपल जल
कोना-कोना हो प्रकाशमान ऐसा तू जल प्रतिपल जल,,।।
🌸अज्ञान में डूबे जीवन कश्ती
ज्ञान मार्ग से विचलित
विकास पथ की हो दृष्टि
ऐसा तू जल प्रतिपल जल ,,।।
🌸 धर्म पताका फहरे नियमित
अधर्म जाल हो संकुचित
सदा रहे मन मंदिर प्रज्वलित
ऐसा तू जल प्रतिपल जल,,।।
🌸टिमटिमांए अट्टालिकाएं
मुस्कराए सब द्वार कल
क्रंदन रहित हो अब कुटियाएं
ऐसा तू जल प्रतिपल जल,,।।
🌸प्रेम ज्योति फैलाए जा
श्रृद्धा सुमन खिलाए जा
त्याग की लौ बन जाए ज्वाला
ऐसा तू जल प्रतिपल जल,,,।।
(रचना,, स्वरचित मौलिक अप्रकाशित )
,,, देवेन्द्र सोनी ©®🌹,,
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

100% LikesVS
0% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!