कवितासाहित्य

कब आओगे

__प्रीति चौधरी”मनोरमा”

कब आओगे ओ मनमीत
आता नहीं किसी विधि चैन।
व्यथित हो रहा है अंतर्मन
तेरी राह निहारें नैन।

चाहे हर क्षण दर्श तुम्हारा
टूटे मन का तुम्हीं सहारा
तुम बिन अँधियारी सब राहें
आकर तुम कर दो उजियारा।
विरह वेदना पीर जगाती
सदी बन गई देखो रैन।
कब आओगे ओ मनमीत
आता नहीं किसी विधि चैन।

आओ प्रियवर हृदय-कक्ष में
कह दो मन से मन के पक्ष में
तुम बन गए हो मेरे दिवाकर
पृथ्वी बन मैं घूमूँ अक्ष में।
विरह पीर का स्राव है होता
बदली बनकर बरसे नैन।
कब आओगे ओ मनमीत
आता नहीं किसी विधि चैन…

तेरे प्रेम में बनी हूँ मीरा
यह जग माटी, तू ही हीरा
विष के जैसी कटु है दुनिया
प्रेम तुम्हारा जैसे शीरा।
अव्यक्त लगाव जान लो प्रिय
पढ़कर प्रेम पगे यह बैन।
कब आओगे ओ मनमीत
आता नहीं किसी विधि चैन…

प्रीति चौधरी”मनोरमा”
जनपद बुलंदशहर
उत्तरप्रदेश

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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