कवितासाहित्य

कभी दूसरो से दिल न लगाना

__शायर आनंद कनक

कभी दूसरो से दिल न लगाना
आए जिंदगी में तुफा जताना।।
कभी अंखियों से आंसू ना बहना
बरसे तो मन को समझना।।
प्यार वफ़ा करके झुंठी कसमें खाना
फिर तुम्हारा रहेगा कहां ठिकाना।।
झूठी बातों से मन को समझना
गरमी में प्यार का एहसास पुराना।।
बीती बातों को भूलना बिसरना
ये दर्द उनका सदा से ही पुराना।।
झोली भर भर खुशियां लाना
हर दर्द में यूं ही तो मुस्कुराना।।
ये जीवन का झमेला आना जाना
मुहब्बत करके क्यों पछताना।।
ख्वाबों में मन को यूं ही समझना
लड़ झगड़कर घर वापस जाना।।

शायर आनंद कनक
बूंदी राजस्थान

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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