साहित्य

करती हूं तेरा इंतजार

करती हूं तेरा इंतजार
करके सोलह श्रृंगार
जब एक झलक देखूँ
लगे जैसे आयी बाहर

बैठी दर्पण के सामने
तेरे मीठे सपने सजाए
अब तो आ जा हरजाई
दिल मेरा तुझे बुलाये

तू ही मंजिल है मेरी
तुझ तक मेरा रास्ता
ये दिल कुर्बा तुझपे
अब दुनिया से न वास्ता।

अर्पणा दुबे अनूपपुर।

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!