साहित्य

करवा चौथ का चांद

मधु अरोरा

प्यारा प्यारा पावन होता करवा चौथ का चांद,
मनभावन सुहावन होता करवा चौथ का चांद।
कार्तिक आते ही सुहागिनों के मन खिल जाते ,
वैलेंटाइन सा लगे है यह चौथ का चांद।
सुहागन कर सोलह सिंगार मेहंदी महावर,
बिंदी ,झुमका ,पायल, नथनी ,टीका से करें श्रृंगार।
दर्पण में रूप निहारे अपना शर्माए हर बार,
पति के मन को लुभाए उनका यह श्रृंगार ।
चूड़ियों की खन खन पति के मन को भाएं,
चंद्रमा अपना इंतजार करवाए हरदम।
निर्जल व्रत रखती है वह तो गणपति जी से आशीष पाएं।
माथे की बिंदी सजी रहे ,पति उनका दीर्घायु पाएं।
बस यही ईश से हरदम मांगे,पूरी श्रद्धा से व्रत रखती
चंद्रमा का इंतजार है करती चंद्रमा भी नखरे दिखाता
धरती के सिंगार को आता रूप मनोहर उसका लागे
रोज समय पर मैं तो आता तनिक नहीं नखरे दिखलाता।
थोड़ा भाव आज मैं खाता दिन आज हमारा है।
माना चांद तुम्हारा कहने से जल्दी घर आ जाएगा।
थोड़ा इंतजार हमारा कर लो आज व्रत तुम्हारा है।
चलो तुमको ना ज्यादा तरसाऊंँगा जल्दी मैं आता हूं
अपने आने से पहले तारों की बारात में लाता हूं
करवा जल तुम भर लो चौथ माता की कथा तुम सुनलो
अध्य अर्चन वंदन कर लो आशीष तुम्हें दे जाता हूं
खुश रहो सदा तुम अपने पिया संग मन में खुशी मनाता हूं।
जल पिलाया पति ने तुमको संग में खाना खा लेना।
गणेश जी को मना कर रिद्धि सिद्धि संग ले आना।
चौथ माता इच्छा करें पूरी यह विश्वास जगा लेना,
करवा चौथ व्रत रख आशीष तुम सदा पा लेना।।
रचनाकार ✍️
मधु अरोरा
21.10.2021

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