साहित्य

करवा चौथ

मधु रानी लाल

हाँ, तेरे लिए
सिर्फ तेरे लिए
करवा चौथ का व्रत धरूँ
निर्जला रह पूजन करूँ
साँझ ढले
चाँद जब निकले
अर्घ्य प्रेमांजलि के दूँ
चलनी से देखूँ
चाँद एक गगन का
एक हृदयाकाश का
तेरे हाथों व्रत तोड़ूँ
मैं बावरी तृप्त हो जाऊँ
लगे प्यारा तेरा संग
तुझसे ही जीवन-रंग
साँस जब आखरी लूँ
पहलू में तेरे रहूँ
छवि हो सामने तेरी
कामना है यही मेरी

—– मधु रानी लालमधु रानी लाल
आर. पी. एस. मोड़
पटना, बिहार।

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