साहित्य

कल्पक की कल्पनाएं

नितेश नागवंशी

उछाह मानसी शशोपंज करता कल्पक अंकिनी को..
हिमकर-दिनकर मनन करता-करता प्रश्न संगिनी को..
द्युति रूपी विधु के धवल अर्चि को..
शशि मित्र ओज रूपी रवि के द्रुत सुर्ख़ी को..
या वैराग्य का चिंतन करता मानों श्रीपति अंगिनी को..

मंद-मंद झूमते हुए प्रभंजनों के आभासों को..
संग-संग बरसने वाले अंबुधरो के पूर्वाभासों को..
कुसुम मोद लेता इंद्रधनुष रूपी तितलियों को..
सौरभ छितराती नवजात रूपी कलियों को..
या अंतःकरण से वर्णन करता सुधा रूपी तरंगिनी को..

गिरते अथोमेह से मृत्तिका की सौंधी गंधि को..
घने गहन में बसे जीव-जन्तुओं के संधि को..
ऋक्षो से निर्मित भिन्न हिमकत निःसर्ग के चमत्कारों को..
चिंतन करता धर्म कारणभूत मनु-से-मनु के तिरस्कारो को..
या स्वमेव उत्साह भरता दृश्य देख उषा में हंस-हंसिनी को..

                                    नितेश नागवंशी
                                   रायपुर छत्तीसगढ़
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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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