साहित्य

कविता.हमारी राष्ट्रभक्ती.

अमोल मांढरे. वाई.

ये मेरे हिन्दुस्तान के नौजवानों
चलो आगे बढ़े और आगे बढ़े
आसमानोके बुंलीदी को छू कर तो देखो
लेकिन ए मेरे दुनियावालो, ये कभी नहीं भूलना
हम भारतवासी, जायेंगे कल मंगल या अंतरिक्ष पर
लेकिन हमारे पैर, रहेगे हमेशा अपनी धरती पर
और हमारा सिर झुकेगा सिर्फ़
और सिर्फ़ भारतमाता और अपने तिरंगे परl

ये मेरे हिन्दुस्तान के नौजवानों
हम मनाते है खुशी से होली और दिवाली, अपनी धरती परl
लेकिन हमारे जवान देते हैं हमेशा पेहरा अपनी भारत देश के सिमापर l

ये मेरे हिन्दुस्तान के नौजवानों
क्या करोगे तुम फेन्डशिप और व्हालनटाईन डे मानकर
जरा आखो मे पानी लाकर करना सलाम
हमारे वीरजवानो को शहिद दिनपर

ये मेरे हिन्दुस्तान के नौजवानों
मे इस देश का, एक स्वाभिमानी कवी
नही शायद मेरे हातोमे इतना दम
नही शायद वो जिगर के लढ सकू सिमापर
मगर ये मेरे दोस्तों
मे लिख दूगा एक ज्वलंत काव्य अपनी भारतमाता पर
जिसगी गुंज जायेगी दुश्मन के सिमा पार तक
और हमारे भारत देश का
गौरव रहेगा, हमेशा दुनिया के शिखर पर
जहा छत्रपती शिवाजी महाराज ,
और सुभाषबाबू को नमन किया जाता है
जहा भगतसिंग ,राजगुरू और सुखदेव को शहीद का सन्मान मिलता हैl
जहा की युवाशक्ती की गरिमा सात समुंदर पार हैl
जहा के आदर्श स्वराज्य का सन्मान सब दुनिया देखती हैl
जहा के विद्यार्थी विवेकानंद को अपना गुरु मानते हेl
मै उस भारत देश का मे…
एक सच्चा कविराज अपनी राष्ट्रभक्ती के गीत गाता हू l
और जाते जाते मे सिर्फ़ एक बात कहता हूँ
हमारे देश की पोलिस और हमारे देश के वीर जवान अपनी जान को बलीदान देकर अपनी देश की रक्षा करते है l तो हम सब नागरिक भी अपना स्वाभिमान जगाकर, उनके प्रति अभिमान रखे,और तिरंगे की शान हमेशा बढाते रहे l
भारत माता की जय, भारत माता की जय l

कविराज अमोल मांढरे. वाई. जिला.सातारा. महाराष्ट्र. Mobile.7709246740.

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