साहित्य

कह मुकरियाँ (अवधी )

ज्ञानेन्द्र पाण्डेय “अवधी-मधुरस”

कसकयि पुरवा अउ पछियाउं
बिनु यकरे भलु मिलै न ठाउं
छाजै जबहीं होयि रुपहला
यै सखि साजनु? ना दुइमहला

जबहिं लगावै हारी-बाती
दीखै तबहिं बड़ौ बक-बादी
सधै बातु जबहीं वा राजी
यै सखि साजनु?ना सखि काजी

होयि वैभवी या भैरवी
आभा विभा या रौरवी
सबही संगु अकंठी बूड़ा
यै सखि साजनु?ना सखि चूड़ा

कोऊ याको भेदु न जानतु?
मुला भाव सबहीं पहिचानतु
खुली आँखि वा दीखु न अपुने
यै सखि साजनु? ना सखि सपने

चोरी चुपके आवै-जावै
दाना-दुनका गुपचुप खावै
दिनु मा दुरहिनु राति मँझैया
यै सखि साजनु? नाहिं चिरैया

दिखे बिना पाँउनु कै मोढ़े
सुख की सुथरी चादरि ओढ़े
संगु चलै बनिके भलु साया
यै सखि साजनु?ना सखि छाया

संगी बनिके साथ निभावै
झूमि-झूमिके मन बहलावै
दिखै नहीं कबहूँ लाचारि
यै सखि साजनु?ना सखि कारि

शुरू-शुरू वा लागतु मिसिरी
कछुक दिननु महिं बनितौ भखुरी
कबहुँ हौ रानी कबहुँ भवानी
सुन्नरि सजनी?ना सखि बानी

लसलसही बनि लासा लावै
जे चाखै पुनि-पुनि ढ़रकावै
रसिकनु ताईं सुधी शिवालय
यै सखि सजनी? ना मदिरालय

फूँके पै मिसिरी सी घोलै
सुनि-सुनि हिया विरह अति हौलै
खाली-खाली दीखै सँसरी
यै सखि साजनु?ना सखि बँसुरी

बिना चले ही राह दिखावै
ताल तलैया कुँआ झँकावै
सड़क गाँउ जँगल भलु बस्सा
यै सखि साजनु?ना सखि नक्सा

बिनु दाना-पानी के घालै
उसरी-परती सबहीं सालै
चतुर-सयानो सबहीं मोखा
यै सखि साजनु?ना सखि धोखा

मोखा- प्रभावित करना

जबहीं आवै होसु उड़ावै
मुला सबहिं का बलुभै भावै
चढ़िके कपरी बनवै जींद
ये सखि साजनु? ना सखि नींद
जींद–भूत(मरे के समान )

रगरै जबहीं आगि लगावै
दुरहिनु ते भलुके डरवावै
संगे माहिं रचावै साजिस
यै सखि साजनु?ना सखि माचिस

जितनै यैंठै बनै उ कुर्रा
फरफरायि जैसिनि हौ जुर्रा
लखि-लखि वाही सबहीं रूछें
यै सखि साजनु?ना सखि मूछें

आवै जबहिं होयि उजियारा
लखि-लखि मुदित होयि घर-द्वारा
रञ्चौ राह मिलै जायि फाँद
यै सखि साजनु? ना सखि चाँद

सीत घाम बरखा सबु खेवतु
खुलिके हौ सबहीं का सेवतु
नर-नारी सबहीं भलु भाता
यै सखि साजनु?ना सखि छाता

देखि-देखि वा भलु ललचावै
छू छूकर सबु मन बहलावै
मिलै न जौ तौ आवै रोना
यै सखि साजनु? ना सखि सोना

टें टें टें हरदम उच्चारै
केऊ बोलै नकलु उतारै
खाता-पीता डटिके सोता
यै सखि साजनु?ना सखि तोता

चमु-चमु चमुकै लुकि-लुकि जायि
विरह जगावै उड़ि-उड़ि जायि
लखि-लखि वाही सबहीं मगनूँ
यै सखि साजनु? ना सखि जुगनूँ

    ज्ञानेन्द्र पाण्डेय "अवधी-मधुरस" अमेठी
                 8707689016
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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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