साहित्य

काबिल

तवज्जो दो उनको जो उसके काबिल हों
कभी हमें भी तो, किसी की तवज्जो हासिल हो।

है पैर की जूती जो समझे औरत को,
वह शख्स शायद जिंदगी में सबसे ज्यादा जालिम हो।

टुकड़े-टुकड़े जो तुम्हारे एहसासों के कर दे
छोड़ दो ऐसे शख्स को जो जिस्मों का सिर्फ मालिक हो

मत रोना उसकी खातिर जो भंवर में छोड़ जाए तुमको,
तुम अपनी जिंदगी के खुद मुख्तार बालिग हो।

सिर पर चढ़ाओ प्यार को पर रखना हमेशा याद
तुम्हें समझे जो अपना हमनवां, वही दिलों का मालिक हो

जो समझे तुम्हें अपनी रवाया फकत ,’सीमा’
उससे दूर का सलाम रखना ,ही बस काफी हो।

स्वरचित सीमा कौशल
यमुनानगर हरियाणा

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