कवितासाहित्य

किताबें

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__सुषमा दीक्षित शुक्ला

इन किताबों की शख्सियत ,
तो देख लो ज़नाब ।

बस खमोशियाँ वजूद में,
पर ज़ेहन में है इंक़लाब।

ना बोलकर भी बोल देतीं,
हर सवालों के ज़बाब ।

क्या सही है क्या ग़लत है ,
दामन में हैं सारे हिसाब ।

ये सिखाती हैं बहुत कुछ ,
पुन्य क्या है क्या अज़ाब ।

ज्ञान की गंगा इन्ही में ,
सबक भी हैं बेहिसाब।

इश्क़ कर लो यार इनसे ,
फिर बनोगे कामयाब ।

इन किताबों की शख्शियत ,
तो देख लो ज़नाब ।

बस ख्मोशियाँ वजूद में ,
पर ज़ेहन में है इंक़लाब ।

इनकी शोहबत से मिलेगा ,
नूर , जैसे आफ़ताब ।

दोस्त इनको तुम बनालो ,
हो न पाओगे ख़राब ।

सुषमा दीक्षित शुक्ला

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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