कवितासाहित्य

किस्मत

बिमल काका गोलछा “हँसमुख”

किस्मत ही कुछ ऐसी थी मेरी,
एक राह पर उसे मिला दिया।
सोया हुआ कभी भाग्य मेरा,
उसमें उसने प्यार जगा दिया।।

जब कभी चाहा, रूठना उससे,
उसकी हंसी देख मुस्करा दिया।
सदा चाहा उसको, जी भर मैंने,
फिर कैसे, मुझको भूला दिया।।

सह ना सकूंगा, मैं उसकी जुदाई,
उसने मुझको कैसा सिला दिया।
“हँसमुख” आँखों से झरता पानी,
उसकी यादों ने मुझे रूला दिया।।

बिमल काका गोलछा “हँसमुख”
श्रीडूंगरगढ़ (बीकानेर) राजस्थान

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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