साहित्य

कीमती है विश्वसनीयता इसे कभी ना खोएं

विश्वास एक ऐसा मजबूत स्टिकर है,
लग जाने पर जल्दी नहीं निकलता।

यदि कोई उसे उखाड़े तो उखड़ता है,
किन्तु दुबारा वैसे ही नहीं चिपकता।

इसलिए विश्वास से कभी मत खेलना,
यही ऐसी चीज है जिसे नहीं तोड़ना।

एक बार यदि टूट जाता यह विश्वास,
यही है सारासच बने न फिर विश्वास।

दुनिया में विश्वास से ही चलता काम,
मर्द वही है जो तोड़े ना देकर ज़बान।

इसी से पैदा होता है धीरे-2 विश्वास,
अजनवी भी जगह बना लेता खास।

बड़ा बुरा वक्त है किसपे करें विश्वास,
सारा सच ये कि बच्चे ही तोड़ें आस।

माँ-बाप का बच्चों पर जो है विश्वास,
वक्त बदलते देर न रहते नहीं वे पास।

बूढ़े माँ-बाप रहते घर में अब अकेले,
इच्छा नहीं रही पोते पोती संग खेलें।

इस पीढ़ी में देखा बीबी बच्चा प्यारा,
जन्म देने वाले को न है कोई सहारा।

ऐसा तो संस्कार नहीं था कोई पहले,
कैसे सोच ये विकसित है कैसे बदले।

एक दिन तो सब को बुढ़ापा आएगा,
अकेलापन काटेगा आनंद न आएगा।

बुढ़ापे में लाठी बनें था ऐसा विश्वास,
टूट रहाहै संसार में ये मुहावरा खास।

जग में केवल स्वार्थ है न रहा विश्वास,
अपने भी अपने नहीं किसे कहें खास।

मन में बसाओ श्रीराम को भजो नाम,
बीते जैसा बिताओ प्रभु का लो नाम।

रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
संपर्क : 9415350596

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