साहित्य

कुछ ज़ख्म जिगर के अभी भर नहीं सकते

कुछ ज़ख्म जिगर के अभी भर नहीं सकते
मुश्किल ए हालात है मगर डर नहीं सकते!!

साए की तरह पड़े हैं पीछे कुछ दर्द पुराने
ये अलग बात है अभी कुछ कर नहीं सकते!

गम का दरिया दिल में बेहिसाब मुस्कुराता है,
मगर रेत की मानिंद हम बिखर नहीं सकते!

न ले के जाए कोई बावस्ता हमें उनकी गलियों में,
हमने कसम ली है उन राहों से गुजर नहीं सकते!!

जिम्मेदारियों की जद ने जकड़ रखा है हमें
उस पर हाल ये है हम अभी मर नहीं सकते!!

अभिषेक मिश्रा

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