साहित्य

कोरोना

डॉ भूपेन्द्र कुमार

नियत समय बदले सभी, मौसम पूरे साल ।
निष्ठुर पर बदला नही, कोरोना निज चाल ।।१

आँखमिचौली खेलता, छुपकर करता घात ।
कोरोना घातक बड़ा, कहते सब यह बात ।।२

कोरोना की मार से, हुए प्रभावित काज ।
सुखद पलों की आस है, दुःखी जनों को आज ।।३

कोरोना के काल में, सोच समझ मुख खोल ।
जो सबके अनुकूल हो , शब्द वही बस बोल ।।४

मानव तनिक विचार तू, प्रकृति क्यों क्रुद्ध ।
कर्म कौन से नर तेरे, स्वाँस हुए अवरुद्ध ।।५

कोरोना तांडव करे, दहशत में हैं लोग ।
साँस घोंट जीवन हरे, ऐसा निष्ठुर रोग ।।६

कोरोना का अन्त हो, उगे हर्ष आदित्य ।
सुखमय सब संसार हो, करूँ प्रार्थना नित्य ।।७

मौलिक अप्रकाशित दोहे

डॉ भूपेन्द्र कुमार धामपुर बिजनौर उ०प्र०

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