कवितासाहित्य

क्या लिखूॅं??

__मणि बेन द्विवेदी


दर्द पीर आहें आंसू या चीत्कार लिखूॅं ,
वक्त का धोखा कुदरत का प्रहार लिखूॅं
तड़प तड़प कर साॅंसों को थमते देखी
कैसे बेबस अपनों को लाचार लिखूॅं।

मानवता दम तोड़ रही इॅंसा बन दानव,
चन्द सिक्को की खनक में बिकते देखा मानव,
हैवानियत की हद से गुजरे ही जब रक्षक,
कैसे करते साॅंसों का व्यापार लिखूॅं।

बदहवास हो इधर उधर जब भागे अपने,
ख़ून से लतपथ टुकड़ों में बिखरे थे सपने,
चीख चीख जीवन की भीख वो रही माॅंगती,
चिथडो में लिपटा उजड़ा सॅंसार लिखूॅं।

पाई पाई जोड़ के ऊॅंचा महल।बनाया,
कुछ अपनों के हक मारे कुछ किया कराया,
एक बात पूछूॅं सबसे तुम सच बतलाना,
दौलत शोहरत रुतबा कोई काम है आया??

अपनी ही गलती को आओ मिल के स्वीकार लिखूॅं।
कहीं चूक हुई मानव से कुद़रत का प्रतिकार लिखूॅं।
बन्द करो धरती का दोहन नदियों को दूषित करना,
वक्त रहे तू सॅंभल जा मानव गर्दिश का सॅंसार लिखूॅं।

मणि बेन द्विवेदी
वाराणसी उत्तर प्रदेश

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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