साहित्य

गंभीर साजिश

अरुण कुमार त्रिपाठी

मैं जीवित आ गया ऐसा गंभीर कटाक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया है जो यह बताने के लिए पर्याप्त है कि मामला काफी गंभीर है ।
यह घटना दुर्घटना घटित हुए 7 दिन होने को है लेकिन अभी तक इस दिशा में जांच के लिएट प्रारंभिक कदम भी नहीं उठाए जा सके हैं ।यह मामले की गंभीरता से अनभिज्ञता की ओर इशारा कोरता है जबकि मामला गंभीर है अत्यंत गंभीर है ।प्रधानमंत्री का काफिला, खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों से महज 100-200 कदम दूर रह गया था प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने का कोई प्रयास पंजाब पुलिस द्वारा नहीं किया जा रहा था पंजाब पुलिस का प्रमुख अथवा पंजाब प्रशासन का प्रमुख अथवा पंजाब का मुख्यमंत्री कोई प्रधानमंत्री के काफिले में नहीं था जबकि नियमत: होना चाहिए था मुख्यमंत्री ने बाद में बयान दिया है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा में कोई चूक नहीं हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने एक तीन सदस्यीय कमेटी बनाई जब मुख्यमंत्री ने अपना निर्णय पहले ही सुना दिया फिर जांच कमेटी से कोई उम्मीद रखना व्यर्थ ही होगा। इसलिए केंद्र ने घटना के संबंध में सही तथ्य पता करने के लिए एक जांच कमेटी बनाई सुप्रीम कोर्ट ने दोनों दोनों जांच कमेटियों को काम करने से रोक दिया और अपनी ओर से एक जांच कमेटी गठित करने का संकेत दिया ।लेकिन अभी तक कोई जांच प्रारंभ नहीं हुई ।अत्यधिक लापरवाही बरती जा रही है अतः उचित होगा जैसा कि दैनिक जागरण लखनऊ दिनांक 11 /1/21 के अंक में संपादकीय में कहा गया है, जांच कमेटी को समयबद्ध तरीके से जांच करने की हिदायत होनी चाहिए ऐसी उम्मीद माननीय सर्वोच्च न्यायालय से है कि वह मामले की जल्दी-जल्दी जांच करा कर दोषियों को दंडित करे।

अरुण कुमार त्रिपाठी
गोमती नगर _ लखनऊ

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