गजलसाहित्य

गजल पेश ए खिदमत

__कैलाश चंद साहू

खूबसूरत दिलो पर कद्रदानी लिखूंगा
मुहब्बत भरी कहानी जुबानी लिखूंगा।।

हर तरफ फैली फिंजा में रूहानी फिर
बात की बियाबान जुबानी लिखूंगा।।

कुदरत मखमली लिबास में लिपटी
महक तेरे ख्वाबों की रूहानी लिखूंगा।।

कटती नहीं जिंदगी की शाम जब तक
प्यार में बदल कोई बात सानी लिखूंगा।।

प्रेम में भीगी पलकों से ही सही पर
खुदा की इबादत बन कहानी लिखूंगा।।

रातरानी पारियों की मस्ती फिर क्या
रातभर तेरे अश्कों की जुबानी लिखूंगा।।

सनम कुछ लिखे ना लिखे पर इक पल
खुदा की इबादत में एक बानी लिखूंगा।।

दूर रहकर भी दूरियां आती नहीं नजर
फिर पास आने की मेहरबानी लिखूंगा।।

लिपटकर तेरी यादों से फिर रोया था
कनक भरी महफ़िल में जवानी लिखूंगा।।

स्वरचित मौलिक अप्रकाशित

कैलाश चंद साहू
बूंदी राजस्थान

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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