साहित्य

गणपति आय विराजो

गौरी नंदन आ गए, भाद्र चतुर्थी आज ।
विद्या बुद्धि विवेक दे, गणपति साजे ताज ।।

प्रथम निमंत्रण आपको ,हे गणपति महाराज।
भाद्र मास की चौथ है ,आप बिराजो आज।।

श्री गणपति के जाप से ,जीवन मंगल होय।
विघ्न हरण के नाम से, जानत हैं सब कोय।।

प्रथम पूज्य शुभ लाभ दें, मिल जाता सुखधाम।
न्यारे देवों में सभी, गणपति जिनका नाम ।।

प्रेमभाव के पुष्प ले , आई तेरे द्वार।
कृपा मेरे प्रभु आपकी ,विनय करो स्वीकार ।।

विघ्न विनाशक देवता ,कृपा करें भव पार।
मोदक अति प्रिय है लगे ,खिला रहा संसार ।।

पूजन गणपति का करें , करें उचित श्रृंगार ।
विधि से पूजन जो करे ,पाता प्रभु का प्यार ।।

ज्ञान बुद्धि के देवता , रिद्धि सिद्धि के नाथ।
पूर्ण करते कामना , रहते मेरे साथ।।

श्री गणेश जी आपदा ,सारी देते टाल।
अंतर्मन निर्मल करें, ये गौरी के लाल।।

स्वागत को आतुर सभी, सजे हुए पंडाल ।
फूलों की माला सजी ,तिलक सोहता भाल।।

काशी रहे जन्म लिए, कार्तिक लगते भ्रात ।
गौरा इनकी मातु हैं, भोले शंकर तात।।

गणपति बप्पा हो रही ,चहुँ दिशि है जयकार।
भक्तों पर करते कृपा ,नर हो या हो नार।।

गीता पांडे अपराजिता रायबरेली उत्तर प्रदेश

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