साहित्य

गर्मी का छुट्टी

गर्मी का छुट्टी

गर्मी की छुट्टी मिली,
मस्ती की दिन आई,
नानी के घर चली ,
अपनों के संग चली,

आम , लीची खानें लगी,
दोस्तों के संग घूमने लगी,
नए – नए खिलौने मिलें,
यहाँ पें नए मेला लगा ,

गर्मी ने किया परेशान,
वर्षा नें दिया आराम,
आई – क्रीम सें प्यार हुआ ,
वर्षा की बूँद सें इजहार हुआ,

अब गर्मी की छुट्टी खत्म हो गई,
तुम भी वापस आ जाओ ना,
शांत पड़ा है स्कूल तुम्हारा ,
आकर इसको तुम फिर से सजाओ ना

दादा, दादी, चाचा, चाची,
सब को अब टाटा -बाए बाए बोलों ना,
अब तुम भी वापस आओं ना,
नया क्लास है मिलने वाला
जल्दी सें आओं ना

होमवर्क मिला था तुमको,
उसकों पुरा करों तुम,
कभी तुम भूल न जाना ,
सबसें पहलें होमवर्क बनाना,
नई सुबह की तैयारी है ,
नया लक्ष्य कों लेकर आना ,

हर दिन का दूध तुम्हारा ,
कर रहा है इन्तजार ,
मुन कों भी खेलना हैं,
जल्दी सें आ जाओं ना,
हाँ! जल्दी सें आ जाओं ना

मुस्कान केशरी
मुजफ्फरपुर बिहार

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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