कवितासाहित्य

गर्व से कहती हूं मैं एक नारी हूं

__मधु माहेश्वरी गुवाहाटी असम

नहीं किसी से बैर मेरा, ना मैं कोई किसी पे भारी हूं
पर हां,गर्व से कहती हूं कि मैं एक नारी हूं।
सृजन शक्ति देकर प्रकृति ने, मुझे अनूठा मान दिया
सृष्टि की हर शह में बैठी,बन महतारी हूं
गर्व से कहती हूं कि मैं एक नारी हूं
बेटी से सृजनी तक जाने, कितने रूप जिऊं हर दिन
जीवन की बगिया की, मैं ही तो फुलवारी हूं
गर्व से कहती हूं कि मैं एक नारी हूं
कौशल्या बन राम सरीखा,मर्यादा पर्याय जनूं
संस्कृति और संस्कारों की,मैं ही संवर्धनकारी हूं
गर्व से कहती हूं कि मैं एक नारी हूं
कृष्ण सरीखे पूर्ण पुरुष को, पालूं मात जसोदा बन
ममता और स्नेह की, मैं ही तो इक नदिया न्यारी हूं
गर्व से कहती हूं कि मैं एक नारी हूं
विष पी जाऊं मीरा बन,राधा बन कान्हा में समाऊं
प्रेम,समर्पण,त्याग,तपस्या,हर रूप मनोहारी हूं
गर्व से कहती हूं कि मैं एक नारी हूं
दुर्गा बन असुरों को संहारू,सावित्री बन प्रेम को सींचू
कोमल हूं प्रकृति से चाहे,स्वाभिमान पुजारी हूं
गर्व से कहती हूं कि मैं एक नारी हूं
कुछ अपनी भी चिंता कर लूं,अपने को इंसान बनालूं
अपने सपनों की मैं सुंदर ज़मीं,विषदअसमान बनालूं
निज को भी जी लूं जी भर के,जागृत चेतन नारी हूं
गर्व से कहती हूं कि मैं एक नारी हूं

@मधु माहेश्वरी गुवाहाटी असम

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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