कवितासाहित्य

गहराई

आवाज की गहराई बता देती है मन कैसा हैं !
शब्द अदा करते हैं बानगी हृदय की।
रिश्तो के मयाजाल से
कौन बच पाया है।
कभी खटटे कभी मीठे ,
कुछ ठहरे से रुके से,
कुछ भागते दौड़ते से।
हर हाल मे जों निभा दे,
वो रिश्ते मोती से।
मीलों लंबी दूरी
भी प्यार को कम
नहीं कर पाती ।
दिल की गहराइ‌यो
से लिखे है अपने
कुछ नायाब से रिश्ते
जो मुझको है प्यारे दिलो जान से।
पानी से पारदर्शी
ये प्यारे रिश्ते
हमारे तुम्हारे।
दिल की गहराई तक
जाती एक ही आवाज
वो है स्नेह।
स्नेह का बंधन बांधे
मन के मनके।
आओ मजबूती से थामें
कही बिखरे ना ये मनके !!

©️Dr Daksha Udhani
Ahmedabad Gujarat

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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