LiteraturePoemसाहित्य

ग़ालिब, मीर नहीं”


__शेख रहमत अली बस्तवी
बस्ती (उ, प्र,)

साहित्य एक जो अमर-अजर
उसे भेद सके कोई तीर नहीं
लिखता हूँ कविता, ग़ज़ल, शायरी
पर मैं ग़ालिब, मीर नहीं

बहुत हुये साहित्यकार
पर तुलसी, सूर, कबीर नहीं
रहिमन के रसखान छंद सा
सुंदरता, गंभीर नहीं

खूब सुना था बचपन में
मैंने वीरों की कहानियाँ
बहुत हुये बलवीर मग़र
उस्मान गाज़ी सा वीर नहीं

राजा, महाराजा भी जंगें
लड़ते थे तलवारों से
तलवारों में चमक तो थी
पर ज़ुल्फिकार समशीर नहीं

ख्वाज़ा के करामातों से
हुये थे मुसलमां नब्बे लाख
सूफ़ी, संत हुये कितने पर
क़ादिर जिलानी जैसे पीर नहीँ

शेख रहमत अली बस्तवी
बस्ती (उ, प्र,)

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कुमार संदीप

अध्यापक सह लेखक । निवास स्थान- सिमरा(मुजफ्फरपुर) बिहार । विभिन्न साहित्यक पत्र पत्रिकाओं में निरंतर रचना प्रकाशन । कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित । वर्तमान में ग्रामीण परिवेश में अध्यापन कार्य सहित दि ग्राम टुडे मासिक व साप्ताहिक ई पत्रिका के अलंकरण का कार्य।

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