साहित्य

गिरा के हमरा गुलशन पर बिजुरी

गिरा के हमरा गुलशन पर बिजुरी, तोहरा मुस्काये आ गइल बा,

नेह लगा के धोखा तूं कइलऽ दिल के हमरा बुझा गइल ब।

राह के रेत ना देले बा धोखा
बात कइलऽ तूं बहुत अनोखा
खोंता में हमरा आग लगइलऽ, नजर में हमरा बुझा गइल बा। नेह लगा,,,,।

आंख के सोती सुखत ई नइखे
दरद ई दिल के रूकत ई नइखे
दिल में तूं औजार छिपइलऽ, जवन कि हमरा लखा गइल बा। नेह लगा ,,,,,,।

टाट के जिनिगी बाट के जिनिगी
ना रहल कवनो घाट के जिनिगी
प्यार के दिल में रोग लगइलऽ,
रोग से तन ई सुखा गइल बा।
नेह लगा,,,।

विद्या शंकर विद्यार्थी

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