साहित्य

घर-घर महाभारत

विषय:घर-घर महाभारत

बालू लाल वर्मा कोटा-राजस्थान

क़ुदरत की विरासत के लिये,जब लोभ दृष्टि में चढ़ा!
इतिहास कहता बात यह,तब-तब महाभारत गढ़ा !         
जब इंसान जुआं व हवस के पाशों के हत्थे में पड़ा!    
संत्रस्त मानवता सिमटकर,पाप का दानव बढ़ा!             
जब धृतराष्ट्र के सुतों ने,अन्याय का मार्ग चुना !             
तब कृष्ण को कुरुक्षेत्र में,सारथी  बनना पड़ा!             
जब अर्जुन जैसा वीर,रण क्षेत्र में विचलित हुआ!          
तब उन्होनें उपदेश भी,नव मानदण्डों में गढ़ा !            

जब जब इस संसार में,चोट पहुंची वजूद को!              
कुंतीपुत्र को विवश हो,कर्ण भी बनना पड़ा!                
दोष किसको दे भला,होनी तो होकर ही रहे!               
पाप जब बढ़ जायेंगे,फूटेगा निश्चित ही घड़ा।        

इतिहास सारा यही तो,इंसान को समझा रहा!               
पर स्वार्थ वश ना सुधरता,गलत राहों पर खड़ा!            
महाभारत रोज ही,घर-घर में व्यापक हो रहा!        
भाईचारा,प्यार,नित,चौराहों पर रोता खड़ा!          

एक दूजे के लिये रिश्ता,अजनबी सा हो गया !          
जोरु और जमीन हित,निज खून से लड़ना पड़ा!          
तार-तार रिश्ता हुआ,परिवार बेबश रो  रहा !              
निशक्त बेबश बुढ़ापा,वृद्घा आश्रम में पढ़ा!              

बी एल वर्मा,विनोबा भावे नगर,कोटा(राज.)

100% LikesVS
0% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!