साहित्य

घर परिवार

मणि बेन द्विवेदी

घर परिवार में बहता ही खुशियों का सुखधार
बुजुर्ग ही होते हैं खुशियों के आधार
कहते हैं जिस घर के बुजुर्ग हंसते हैं
वहां त्रिभुवन बसते हैं।
परिवार से ही महकती है घर की बगिया
परिवार के मध्य चहकते है बच्चे रूपी चिड़िया।
जब बाहर से बच्चे आते हैं थक हार
तो आंचल तले छुपाती है दादी का प्यार
मां प्यार से करती है सबका मनुहार
रिश्तों की माला पिरोया जाता है घर परिवार में
एहसास की धागे में गूंथा जाता है रिश्तों की माला
कई तरह के फूल महकते है घर परिवार की बगिया में
बांटते हैं एक दूजे का दुःख सुख मिल कर
खड़े रहते हैं सहायक बन कर एक दूजे के लिए
रिश्ते कई जीते हैं घर परिवार में
कई इंद्रधनुषी रंगों से रंगा होता है परिवार
एकता की मिशाल कायम रहता है घर परिवार में
मां की ममता सभ्यता और संस्कार
धरोहर होता है संयुक्त घर परिवार का।
जहां मिलता है बड़ों का दुलार
अपनों का सत्कार।
स्वर्ग से सुंदर होता है संयुक्त घर परिवार।

  • मणि बेन द्विवेदी
    वाराणसी उत्तर प्रदेश
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