साहित्य

चलो आज़ सीखें हुनर

रेखा रानी

चलो आज़ सीखें हुनर ,कुछ अलग कर दिखाने का।
मौन हो उठे मुखर,प्रयास हो सहज गीत गुनगुनाने का।
बात हो बस हर जुबां पर
नारी के उत्थान की।
हर गली हर मोड़ पर हो
चर्चा बस निर्माण की।
बात हो जब भी कहीं भी
बस हो हिन्दुस्तान की।
शौर्य गाथा,प्रेम,संस्कृति और बात हो सम्मान की।
दृग चलो डालें उधर,जहां चित्र बीते ज़माने का।
मौन हो उठे मुखर,
सहज गीत गुनगुनाने का।
शोषित व निराश जन में आस फिर से भरने की।
बात हो उजड़े घरों में फिर से रौनक भरने की।
निज वतन उत्थान हेतु
नेक कारज करने की।
द्वेष भाव त्याग मन में
प्रेम फिर से भरने की।
एक सहज प्रयास करें सब समता भाव जगाने का।
मौन हो उठे मुखर,प्रयास हो सहज गीत गुनगुनाने का।
खिल उठें हृदय सभी के, प्रेम का झरना बहे।
विकसे हर जन में मनुजता,क्षय दनुजता का रहे।
तम हरें अज्ञानता का, इल्म को रोशन करें।
रेखा मन से छल कपट का दूर हम दैत्य करें।
महकेगा फिर से चमन यह दस्तूर ज़माने का।

रेखा रानी
विजयनगर गजरौला,
विकास क्षेत्र गजरौला,
जनपद अमरोहा,
उत्तर प्रदेश, भारत।

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