साहित्य

चल ,आगे बढ़ता चला तु

गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद

चल ,आगे बढ़ता चल तु , तेरी यह नहीं है मंजिल।
तु रह जायेगा पीछे, इनसे तु नहीं लगा दिल।।
चल, आगे बढ़ता चल तु———–।।

बहुत रंगीली है दुनिया, रूप बदलती है पल में।
यह मतलब की है दुनिया, प्यार भूल जाती है पल में।।
मत इनपे लुटा तु जिंदगी, यह नहीं है तुमसे वफ़ा दिल।
चल, आगे बढ़ता चल तु———-।।

दिया नहीं क्यों साथ तेरा, जबकि ये थे तेरे अपने।
बहुत रुलाया तुमको इन्होंने, तोड़ तेरा दिल और सपने।।
बदनाम नहीं हो इनके लिए ,नहीं काम आयेंगे सच ये कल।
चल, आगे बढ़ता चल तु———–।।

इनको चाहिए तेरी दौलत , और तेरा बलिदान इन्हें।
सच में बहुत है बेरहम, नहीं आते हैं ऑंसू इन्हें।।
तुमको करना नाम तेरा तो, इनसे रिश्ता तोड़ ,आगे चल।
चल, आगे बढ़ता चल तु————————।।

अगर नहीं कोई साथ तेरे, मत हार ऐसे हिम्मत तु।
तु हंसने दे इनको तुम पर, मत होना कभी निराश तु।।
विश्वास रख खुदा पर तु , तेरा ख्वाब होगा एकदिन झिलमिल।।
चल, आगे बढ़ता चल तु———–।।

रचनाकार एवं लेखक-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
मोबाइल नम्बर- 9571070847

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