साहित्य

चाँद तू जल्दी आना

मीना माईकेल सिंह

शरद रात की चाँदनी ठंडी समीर का हो रहा है समीरण,
आज की रात सौभाग्यवती होने की महिमा से भीगे कण कण।

लाल जोड़े में सजी आज मैंने सोलह श्रृंगार किया,
हे मेरे चाँद आज जल्दी आ जाना आते ही होंगे मेरे पिया।

व्रत तोड़ने की नहीं है मुझकों जल्दी तेरा रूप निखर आये एक बार,
देख कर तेरा मनोरम छवि खुशी से मैं नाच उठूंगी बारम्बार।

चाँद आज तू जल्दी आना बिन तेरे बिन करवा चौथ का कटता नहीं यह पल,
छम-छम कर बजती है मेरी पैंजनी तुम्हें बुलाती है अब आ भी जा छोड़ न कर कोई छल।

चाँद अब जल्दी से आ जा बिन तझको देखे कैसे देखूंगी पिया का मुख,
प्रियतम के हाथों जल का पान करूंगी और भोगूँगी मैं अनन्त परम सुख।

कटती नहीं अब यह पल अब क्या करूँ तू ही आकर यह बता जा,
मेरे श्रृंगार फीके न पड़ जाए करके इतना इंतजार अब अभी जा।

नभ में मंडराते घन-संग बहुत हो गया तेरा यह लुका-छिपी,
करवा चौथ के दिन क्षमा करो हे शशि अब आ भी जाओ करो न जिद्दी।

हे चाँद आज तू जल्दी आ जाना सुहागन होने का आशीर्वाद दे जाना,
सदा बहारों से भरी रहे मेरी बगियाँ यही सौगात अपनी बहन को दे जाना।

स्वरचित-मौलिक रचना
मीना माईकेल सिंह
कोलकाता

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